
बालोद जिला पंचायत के पूर्व सभापति भाजपा नेता अभिषेक शुक्ला किसान को साथ लेकर मिले कलेक्टर से ठेकेदार ने फर्जी सहमति पत्र लगाकर खेत से मुरम खोद खेत को बना दिया तालाब मुआवजा सहित कड़ी कार्यवाही की मांग की
मुआवजा के लिए तीन साल से भटक रहा है किसान
बालोद। प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत सुरेगांव से दुधली मार्ग निर्माण कार्य के लिए बाफना कंस्ट्रक्शन कंपनी दुर्ग द्वारा मुढ़िया के किसानों की जमीन से मुरम खोद कर जमीन को अनुपयोगी बनाकर छोड़ दिया गया है। किसान गुलवीर सिंह निषाद व सह खातेदार चैतन्य सिंह निषाद की खसरा नं. 590 रकबा 0.75 हे. जमीन अब खेती के लायक नहीं रही जमीन तालाब में तब्दील हो गई l 2019 में उक्त कंस्ट्रक्शन कंपनी ने खनिज विभाग से किसान की फर्जी सहमति पत्र तथा पंचायत से एनओसी लेकर 5000 घन मीटर मुरम परिवहन व खोदने की अनुमति ले ली और किसान के आपत्ती के बाद उसे भूमि समतलीकरण कर कृषि योग्य बनाने का आश्वासन देकर उसकी भूमि से लगभग 15000 घनमीटर मुरम परिवहन कर लिया किंतु कृषक की भूमि को न ही समतल किया और न ही उसे समतलीकरण कराने के लिए साधन उपलब्ध कराया जिसके बाद कृषक द्वारा कलेक्टर जन चौपाल में इसकी शिकायत की गई थी।
शिकायत पश्चात जांच अधिकारी द्वारा ढुलमुुल रवैया अपनाते हुए जांच तो की गई लेकिन
छ.ग. ग्रामीण विकास कार्यपालन अभियंता सह सदस्य सचिव द्वारा प्रकरण को यह कहकर खारिज कर दिया गया कि आवेदक उक्त भूमि का भूमि स्वामी नहीं जबकी आवेदक सह खातेदार है। जिसके बाद से किसान ने कलेक्टर जनचौपाल के माध्यम से पुनः आवेदन किया लेकिन संबधित विभाग द्वारा उक्त प्रकरण में कोई कार्यवाही नहीं की गई जिससे नाराज किसान ने आमरण अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है।
शासन प्रशासन की लचर व्यवस्था से किसान परेशान – कृषि भूमि हो गई अनुपयोगी– अभिषेक शुक्ला निर्माण एजेंसी ने उसके खेत को इतना गहरा खोद दिया है कि पिछले तीन वर्षों से चैतन्य निषाद एवं उसका परिवार खेती नहीं कर पा रहा है तथा कृषि ही उसके जीवन यापन का एक मात्र जरिया है और वह लगातार कंस्ट्रक्शन कंपनी के दफ्तर में चक्कर काट रहा है अब उसकी आर्थिक स्थिति भी खराब हो चुकी है।
आर.टी.आई. से हुआ खुलासा-
कृषक चैतन्य निषाद ने बताया कि उसके द्वारा मई माह में खनिज विभाग में निर्माण एजेंसी के अनुमति संबधि एक सूचना का अधिकार का आवेदन लगाया गया था जिसमें यह खुलासा हुआ कि कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा दुर्ग में दिनांक 21 नवंबर 2019 को जमीन समतलीकरण करने सहमति पत्र बनाया गया है जिसमें फर्जी हस्ताक्षर व फर्जी पहचानकर्ता के माध्यम से
एक फर्जी सहमति पत्र गुलवीर सिंह निषाद के नाम से बना लिया गया जिसके आधार पर उसे परिवहन की अनुमति प्राप्त की है। खनिज विभाग द्वारा उन्हे 5000 घनमीटर मुरम परिवहन की अनुमति प्राप्त की थी लेकिन उसी के जमीन से लगभग 15000 घनमीटर की खुदाई कर परिवहन किया गया है।
किसान ने किया मुआवजे की मांग- किसान गुलवीर सिंह पिता जीवराखन ने कलेक्टर जनदर्शन के माध्यम से मांग की है कि ग्राम मुढ़िया, प.ह.नं. 19 में स्थित खसरा नं 590 रकबा 0.75 हे. जमीन का वह नंबरदार है तथा उसके चाचा चैतन्य निषाद उक्त भूमि का सह खातेदार है तथा उसके बाहर होने से उक्त भूमि की देखरेख उनके द्वारा किया जाता है इसी अभिप्राय से जनदर्शन में उनके द्वारा मुआवजा के लिए आवेदन किया गया था। उनके द्वारा निर्माण एजेंसी को कोई सहमति पत्र नहीं दिया गया है।
चूंकी विगत तीन वर्षों से उक्त भूमि में फसल नहीं लगाया जा सका है तथा गहरी खुदाई होने के कारण उनकी जमीन कृषि योग्य नहीं रह और अब उसमें पानी भर गया है इसलिए ग्रामीण सड़क अभिकरण बालोद के पास बाफना कंस्ट्रक्शन कंपनी दुर्ग की जमा अमानत राशि से 1600000 (सोलह लाख रूपये) उसके चाचा चैतन्य निषाद को दिया जावे। साथ ही कंपनी द्वारा की गई अवैध खुदाई व फर्जी सहमति पत्र की जांच कर कार्यवाही की जाये।

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