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अरबो रुपयों की रॉयल्टी दबाकर बैठा बालोद जिला प्रशासन,खत्म हो रहा लौह अयस्क नगरी दल्ली का अस्तित्व

अपेक्षा – दल्ली -बालोद को संयुक्त जिला बनाया जा

दल्लीराजहरा – लौह अयस्क नगरी दल्लीराजहरा की जनसंख्या 20 वर्ष पहले जहां 1 लाख 25 हजार के आसपास थी, वहीं आज यहां की जनसंख्या सिमटकर 43 हजार के लगभग रह गई है। मूलभूत आवश्यताओं की कमी के कारण नगर की स्थिति और दयनीय होती जा रही है। वही वार्ड क्रमांक 27 के लोगो को आज अपने वर्षों पुराने घरों को छोड़कर पलायन करने पर मजबूर हो रहे है। रॉयल्टी की अरबों रुपए जारी होने के बाद भी यहां की जनता वर्तमान समय में अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। इसका मुख्य कारण क्षेत्र की लगातार उपेक्षा है, जबकि प्रदेश को सबसे अधिक रायल्टी यहीं से मिलती है। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि यहां के खदानों से अक्टूबर 2015 से 2022 तक जिला खनिज मद में लगभग 2.3 अरब से भी अधिक की राशि दी जा चुकी है।क्षेत्र के विकास के नाम पर महज दो प्रतिशत राशि भी जारी नहीं की जा सकी है। ऐसे में हम कैसे कहें कि विगत सरकार जिसने 15 वर्ष छत्तीसगढ़ राज्य में राज किया था। उस राज्य सरकार ने विकास के नाम पर यहां कुछ कर पाया है। यहां तक सरकार ने जो घोषणाएं पिछले कार्यकाल में की थी वो भी पूरे नहीं कर पाए हैं।

3 साल में भी नहीं बदले हालात

विभाग से मिले आंकड़े के मुताबिक दल्लीराजहरा के खदानों से लौह उत्खनन के एवज में बीएसपी प्रबंधन द्वारा प्रतिमाह लगभग 4 से 5 करोड़ रुपए खनिज रायल्टी के रूप में जारी किए जाते हैं। जिला खनिज विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बालोद जिला खनिज संस्थान न्यास में अक्टूबर 2015 से जनवरी 2017 तक 69 करोड़ 42 लाख 13 हजार 824 रुपए प्राप्त हुए हैं। इसी तह फरवरी 2017 से मार्च 2021 तक लगभग 1 अरब 20 करोड़ 44 लाख 84 हजार रुपए प्राप्त हुए हैं। इन वर्षों में अब तक कुल लगभग 2.5 अरब से ज्यादा रुपए बालोद जिला खनिज संस्थान न्यास में खनिज रायल्टी के रूप मेंं प्राप्त हुआ है।

दल्ली- बालोद को संयुक्त जिला बनाने की मांग

पुरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा कराये जा रहे विकास कार्यों की सर्वत्र सराहना होते नजर आ रही है।दल्ली राजहरा और आस पास का क्षेत्रफल, जनसख्या और भू-भाग में बालोद से बहुत अधिक है दल्ली राजहरा से लगे 75 गांव जो कि अधिकांश आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। लगभग 25 गाँव, 10 किलोमीटर के दायरे में आते हैं, जहाँ की आबादी लगभग ढाई लाख से अधिक है। जिन्हे बालोद जा कर अपना सरकारी काम करवाने में अत्यधिक परेशानीयो का सामना करना पड़ता है।इस कारण मानपुर, मोहला, चौकी की तर्ज पर दल्ली राजहरा, बालोद को संयुक्त जिला बनाने की मांग नगरवासियों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से की है। जिससे इस क्षेत्र के लोगों को सरकारी परियोजनाओं का लाभ मिल सके।ऐसे हालात में दल्लीराजहरा नगरवासियों एवम इससे लगे ग्रामीण क्षेत्रों की सुविधाओं को देखते हुए दल्लीराजहरा में स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 64,65,66,68/1,69/1,71,71.1/9,76.1/6 पर शासकीय कार्यालय बनाकर दल्ली और बालोद को एक साथ संयुक्त जिला बनाने की शुरुआत की जा सकती है। जिससे संयुक्त जिला बनने के बाद दल्लीराजहरा एवम इससे लगे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होना शुरू हो जाएगा एवम ग्रामीणों को अधिक दूरी तय कर अपने कार्य को नही करना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त नगर एवम आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का साधन खुलता नजर आएगा।

विकास यात्रा में यहां की जनता को कोई मतलब नहीं

इधर नगर की जनता का कहना है वार्ड क्रमांक 27 में 37 परिवारों को रेल्वे विभाग के द्वारा मकान खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। जो पतन की ओर बढ़ रहे नगर में विकास यात्रा भाजपा शासनकाल में माह जून को की गई थी, जिसे लेकर उन्हें कोई खुशी नहीं थी। यहीं के माइंसों से अरबों रुपए से सरकार खजाना भरकर वाहवाही लूट रही है। 50 प्रतिशत राशि बालोद जिले में विकास कार्यों के लिए दिया जा रहा है, पर सरकार की हमसे धोखा कर रही है। लोगों ने कहा जबकि जिला खनिज संस्थान न्यास में से 50 प्रतिशत राशि का 25 प्रतिशत ही प्रतिमाह इस क्षेत्र के लिए जारी करे तो यहां विकास कार्यों के लिए किसी का मुंह ताकना नहीं पड़ेगा।

दूसरे जिलों में बांटे जा रहे यहां के पैसे

पूर्व आकंलन के अनुसार जिला खनिज संस्थान न्यास को प्रतिमाह मिलने वाली कुल राशि में से अब तक 50 प्रतिशत राशि अर्थात 68 करोड़ 29 लाख 45 हजार 781 रुपए बालोद जिला, 20 प्रतिशत राशि 27 करोड़ 31 लाख 78 हजार 312 रुपए राजनांदगांव जिला, 15 प्रतिशत राशि 20 करोड़, 48 लाख 83 हजार 730 रुपए दुर्ग जिला, 10 प्रतिशत राशि 13 करोड़ 65 लाख 89 हजार 154 रुपए कांकेर जिला एवं 5 प्रतिशत 6 करोड़ 82 लाख 94 हजार 577 रुपए धमतरी जिला में वितरित किए जा चुकें हैं।

5 किमी में विकास का निर्णय निकला झूठा

विदित हो कि छत्तीसगढ़ जिला खनिज संस्थान न्यास नियम 2015 के तहत गठित जिला खनिज संस्थान न्यासों में से प्रतिवर्ष 50 करोड़ रुपए से अधिक राशि जिला खनिज संस्थान न्यास निधि में प्राप्त करने वाले 9 जिलों में कराए जाने वाले कार्यों की 3 वर्ष की प्रस्तावित कार्य योजना की समीक्षा बैठक 2 सितंबर 2016 को महानदी भवन सभा कक्ष मंत्रालय में पूर्व मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई थी।जहां खनिज साधन विभाग के सचिव द्वारा जिला खनिज संस्थान न्यास नियम का संक्षिप्त विवरण तथा खनन से संबंधित संक्रयाओं से प्रभावित क्षेत्रों को अधिसूचित करने के संबंध में जिलों द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत किया गया था। जिस पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा निर्देशित किया गया था कि खनन से प्रभावित क्षेत्र के 5 किलोमीटर त्रिज्या में आने वाले ग्रामों को प्राथमिकता में लेते हुए योजना बनाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि ग्रामों मेंं कार्यों से होने वाला विकास 2-3 वर्षों में दिखने लगे। पर नहीं हुआ।

दल्ली का अस्तित्व बचाने सरकार ने क्या किया ?

नगर की जनता का यह सवाल है कि 15 वर्ष राज करने वाली पूर्व सरकार के शासन काल मे विकास यात्रा के माध्यम से पूरे प्रदेश का भ्रमण कर विकास कार्यों का डंका बजाने वाली प्रदेश की पूर्व सरकार का दल्ली पर ध्यान क्यों नहीं था? बताए कि साल दर साल उजाड़ व पतन की ओर बढ़ रहेे नगर के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए पूर्व सरकार ने अपने बीते 15 वर्षों के शासन काल में क्या किया?
जबकि यहां के सामाजिक, व्यापारिक एवं श्रमिक संगठनों द्वारा राजहरा के अस्तित्व के लिए शासन द्वारा सकारात्मक पहल कराने लगातार आंदोलन के साथ मांग पत्र आला अधिकारियों एवं मुख्यमंत्री को दिया गया था। वही मौजूदा सरकार का भी हाल कुछ ऐसा है कि बेराजगारों को रोजगार देने के लिए उद्योग धंधे की व्यवस्था तो दूर मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं करा पाई। यहां की राशि को दूसरे जिले राजनांदगांव, दुर्ग, कांकेर व धमतरी में क्यों वितरित किया जा रहा है। आखिर क्यों दल्लीराजहरा व आसपास क्षेत्र के गांवों की उपेक्षा की जा रही है?

एकतरफ बीएसपी दूसरी ओर रेल्वे, जनता कहा जाए

दल्लीराजहरा क्षेत्र में 270 एक जमीन को बीएसपी सुप्रीमो द्वारा राजस्व को दिया गया। क्योकि उनके किसी कार्य का नही था। बावजूद इसके दल्लीराजहरा में ऐसे कई क्षेत्र है जहां बीएसपी सुप्रीमो का कोई कार्य नही होता है फिर भी आम जनता को परेशान किया जाता रहा है। वही दूसरी ओर रेल्वे के पास भी सैकड़ो एकड़ जमीन ऐसी खाली पड़ी है जिसका उपयोग होना बमुश्किल लगता है। 27 नंबर वार्ड को रेल्वे प्रबंधन अपनी जी जान से तोड़ने में लगी है। यदि रेल्वे चाहे तो आम जनता के लिए अपने प्रोजेक्ट को कम कर काम चला सकती है या कहे तो रेल्वे जमीन पर बसे लोगो को अपने खाली पड़े सैकड़ो एकड़ जमीन पर आशरा दे सकती है। दल्लीराजहरा क्षेत्र में बीएसपी प्रबंधन के बाद अब रेल्वे प्रबंधन भी अपने तानाशाही और अड़ियल रवैये पर उतारू हो चुका है। जिसका जीता जागता उदाहरण वार्ड क्रमांक 27 में पिछले 6 दशक से निवासरत आम जनता पर हो रहे रेल्वे प्रबंधन के अत्याचार है।

अधिकारी कर रहे राशि का दुरूपयोग

प्राप्त सूत्रों के अनुसार खनिज न्यास निधि की राशि का जिले में बैठे अधिकारी दुरूपयोग कर रहे हैं। जानकारी दी गई कि खनिज न्यास निधि की बैठक में उनके द्वारा हमेशा जिन ग्रामीण क्षेत्रों में अतिआवश्यक कार्य को पूरा करने के लिए बात रखी जाती है, कलेक्टर द्वारा नहीं करवाया जाता है।जिन कार्यों की आवश्यकता नहीं है, जिन्हें बाद में भी कराया जा सकता है ऐसे कामों में व्यर्थ पैसा खर्च किया जा रहा है। बालोद जिले को खनिज न्यास निधि से जो राशि प्राप्त होती है उसे अन्य जिलों मेें वितरित किया जाना गलत है। बैठक में इस बात का विरोध किया था। जनप्रतिनिधियों की बातों की अधिकारी उपेक्षा करते हैं। जबकि दलकीराजहरा क्षेत्र में स्थित भूपेश सरकार की सरहानिय पहल से शहरी एवम परिवार कल्याण योजना के तहत खोले गए 100 बिस्तर अस्पताल में आज भी जरूरत की सुविधा नही है। और न ही डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है और सर्वसुविधा बनाने की कोशिश की गई है। वही दूसरी ओर देखा जाए तो प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चिखलाकसा जो की विगत 30 वर्षो से मात्र 10 बेड का ही अस्पताल है। जिसके कारण आसपास के ग्रामीणों को इलाज कराने जिला चिकित्सालय बालोद लगभग 40 किलोमीटर दूर तय जाना पड़ता है।

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