
दुर्ग :- आयुर्वेद में ज्योतिष शास्त्र का महत्वपूर्ण स्थान है। ज्योतिष शास्त्र के सहयोग से प्राचीन चिकित्सा पद्धति बहुत कारगर रही है । आयुर्वेद संहिताओं में रोगो का निर्धारण दो तरह से किया जाता है दोषज और कर्मज। सामान्य रूप से दोषज रोगों की चिकित्सा औषधियों द्वारा हो सकती है किंतु कभी-कभी ऐसे भी असाध्य रोग होते हैं जिनकी चिकित्सा औषधियों से करने पर भी लाभ नहीं मिलता उन स्थितियों में ज्योतिष शास्त्र की सहायता लेना उचित होता है क्योंकि ज्योतिष शास्त्र से पूर्वकृत शुभाशुभ कर्म के आधार पर रोग का निर्धारण होता है विधिवत उसकी चिकित्सा आरंभ होने से निश्चित ही असाध्य से असाध्य रोगों को भी ठीक किया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ में पहली बार मेडिकल एस्ट्रोलॉजी कोर्स का शुभारंभ छत्तीसगढ़ आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज मनकी राजनांदगांव में किया गया। इस कोर्स को कालेज के दो एसोसिएट प्रोफेसर ज्योतिष एवं संस्कृत के विद्वान आचार्य नीलेश शर्मा के साथ आयुर्वेद के ख्याति प्राप्त विद्वान डॉ अरुण छाजेड़ ने अथक परिश्रम कर बनाया है जिसमें ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत चिकित्सा के ही भागो को रखा गया है। कोर्स के शुरुआत में ही महाविद्यालय के लगभग 55 छात्रों ने पंजीयन कराया, इस कोर्स को जल्द ही ऑनलाइन करने की भी तैयारी की जा रही है ।

मेडिकल एस्ट्रोलॉजी कोर्स के उद्घाटन अवसर पर महाविद्यालय प्रबंधन की ओर से सुभुति खंडेलवाल ने कहा कि मेडिकल एस्ट्रोलॉजी पर अब ओपीडी की सुविधा भी छत्तीसगढ़ में उपलब्ध होगी। उल्लेखनीय है कि भारत में जामनगर, बेगूसराय और दरभंगा में मेडिकल एस्ट्रोलॉजी ओपीडी की सुविधा है अब छत्तीसगढ़ राजनांदगांव में मेडिकल एस्ट्रोलॉजी की ओपीडी होगी जो भारत की चौथी मेडिकल एस्ट्रोलॉजी ओपीडी होगी। इससे चिकित्सा में कार्य कर रहे विशेषज्ञों को लाभ होगा साथ ही ऐसे मरीजों को भी लाभ होगा जो असाध्य से असाध्य रोगों से गुजर रहे है।
कोर्स के उद्घाटन अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ वर्षा बंजारी ने सभी छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह कोर्स चिकित्सा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक गण एवं छात्र उपस्थित थे।

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