
डोंडी लोहारा/बालोद ‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य जी स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी महाराज ‘1008’ का कल शुक्रवार को बड़ा जुंगेरा स्थित जामडी पाठेश्वरधाम आगमन हुआ है।
शंकराचार्य जी मे मीडिया प्रभारी अशोक साहू ने बताया पूज्यपाद शंकराचार्य जी का 17 दिवसीय प्रवास पर छत्तीशगढ़ आगमन हुआ है वे 06 अप्रैल दिन गुरुवार को रायपुर आगमन हुआ व शुक्रवार को सड़क मार्ग से ग्राम बड़ा जुंगेरा पहुँचे जहा रामबालक दास जी द्वारा आयोजित ब्रह्मवैवर्त पुराण कथा में स्थल पहुँचे व व्यास पीठ से शंकराचार्य महाराज ने कहा श्री ब्रम्हवैवर्त महापुराण कथा प्रारंभ में बताया कि भगवती सुरभि और उन्ही के राशि के लोगों के इस पवित्र प्रांगण में जामड़ी पाठ देवता सानिध्य में श्री राम भगवान, सीता माता के सानिध्य में और परम वैष्णव परम भगवान ऐसे जो हमारे श्रीराम बालक दास जी इनके गुरु जी महाराज के स्मृति में आज यह दिव्य आयोजन हुआ है।
यह कल्पना मन में आई थी कि छत्तीसगढ़ नाम इस प्रदेश का हैं। प्रदेश के लोग बहुत अच्छे हैं। इनके मन में सनातन धर्म के लिए भावना हैं। छत्तीसगढ़ के लोगों का जीवन भी बहुत कुछ धर्म नियंत्रित हैं ऐसी परिस्थिति में छत्तीसगढ़ का जो अर्थ हैं वह किसी समय कुछ और भले रहा होगा। आज इसका क्या अर्थ होना चाहिए ? संख्या किसी नाम में बहुधा नहीं आती लेकिन छत्तीसगढ़ के नाम में एक संख्या विशेष हैं वह हैं 36, हमने पता किया लोगों ने यही इतिहास बताया कि किसी समय 36 रजवाड़े यहां पर थे और परस्पर उनका एक संघ बन गया जितना जितना क्षेत्राधिकार उन रजवाड़ों का बनता था उन सबको मिलाकर के जितनी भूमि होती थी उसको सम्मिलित रूप से छत्तीसगढ़ कहा जाने लगा।
लंबे समय तक यह व्यवस्था बनी रहें। प्रायः हमारे गणराजा आदिवासी राजा छत्तीसगढ़ के राज्यों में रहे और उनका यह पूरा क्षेत्र बना। ऐसा कार्यक्रम चला के रजवाड़े समाप्त हो गए। राज्य व्यवस्था सनातन धर्मियों की व्यवस्था थी। हमारे यहां जो सनातन धर्म के अनुसार राज्य होता हैं। वह उसमें राजा होता हैं। आज जो हमारे देश में व्यवस्था लागू हो गई है कि हम किसी को चुन करके राजा बना देते हैं और उसको राष्ट्रपति कहते हैं। वह प्रधानमंत्री के माध्यम से काम करता हैं। प्रदेश में इसी तरह से राज्यपाल होता है जो मुख्यमंत्री के माध्यम से काम करता हैं। यह एक अलग व्यवस्था है हमारी जो सनातन धर्म की परंपरा हैं। भारत देश व्यवस्था हैं राज्य व्यवस्था है व राज्य व्यवस्था में राजा ही केंद्र होता हैं। राज्य शब्द तो लिया लेकिन राजा को ही हटा दिया जब राजा नहीं है तो राज्य कैसे हो सकता हैं ?
राजा समाप्त हो गए, 36 राजा थे, जिनका गढ़ छत्तीसगढ़ कहा जाता था। अब तो वह रहे नही उनके परिवार जरूर हैं सब लोकतंत्र में समाहित होकर नए जमाने अनुसार अपने आपको व्यवस्थित कर चुके हैं, तो इसका मतलब यह हुआ कि अब जो छत्तीसगढ़ राज्य का नाम है वह केवल नाम रह गया है। इसके अर्थ में छत्तीसगढ़ रहा ही नहीं तो हमने सोचा छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ रहे नहीं तो अब छत्तीसगढ़ नाम का मतलब क्या हैं ? अब इस नाम का मतलब चाहिए, तो क्या मतलब भरा जाए। हमने सोचा कि छत्तीसगढ़ तो रहा नहीं तो यह छत्तीसपढ़ हो सकता है, यानि 36 पढ़ा जाएं तो 36 क्या पढ़ा जाएं ?
36 की संख्या हमारे यहां पहले से उपलब्ध हैं। व्यास जी ने 18 पुराण लिखे व 18 उपपुराण लिखें जिसमें सनातन धर्म को उन्होंने बता दिया। 18 पुराण व 18 उप-पुराण इनको मिला दे तो हो जाता हैं 36, तो छत्तीसगढ़ में 36 पढ़े जा रहे हैं अर्थात 36 पुराण पढ़े जाएंगे। पुराण के प्रेमी यहां के लोग हैं। इस दृष्टि से यह एक प्रक्रिया आरंभ हुई श्रीमद्भागवत का कुछ कुंड लगाया मतलब कुल 38 होंगे।
एक भागवत गीता पाठ शुरू में एक भागवत गीता पाठ अंत में और बीच में छतीसो में एक बार भागवत आएगी, तो इस तरह से अब होगा। इस तरह छत्तीसगढ़ के लिए यह हमारा अनुष्ठान होगा। हमारे मन में छत्तीसगढ़ ने हमें बहुत अधिक श्रद्धा समर्पण दिया हैं, तो इनको भी हम कुछ दे हमारे पास व देने के लिए क्या हो सकता हैं, तो यह पुराण हम आपको सुना दे तो कुछ हम पूरे हुए ऐसा बात हमारे मन में आएगा।
क्योंकि कुछ भगवान श्रीविष्णु के पुराण हैं, जिसको वैष्णव लोग बड़े प्रेम से सुनते हैं। उन्हीं पुराणों में से ब्रह्मवैवर्त एक पुराण है, जो वैष्णव का पुराण है और यह स्वयं श्री वैष्णव है स्वभाविक है इनके मन में इस पुराण को सुनकर निश्चित रूप से प्रसन्नता होगी व इसी बहाने से आप लोग भी सुनेंगे अब आप में से बहुत से लोग जो अक्सर को समझते हैं।

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