
डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र के आगामी चुनावों में कांग्रेस भाजपा के मुख्य मुकाबले में जातीय समीकरण बड़ा फैक्टर
गोंड वोट बैंक में पकड़,सर्व आदिवासी समाज की भूमिका,डौंडी क्षेत्र से दावेदारी,राजपरिवार की दावेदारी या समर्थन,कांग्रेस के लिए एंटी इनकम्बेंसी का खतरा,तो भाजपा में कमजोर संगठन व गुटबाजी भारी
डौंडीलोहारा :- अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए सुरक्षित विधानसभा सीट पर अगर हम आंकड़ो को देखे तो अधिकतर जीत कांग्रेस पार्टी ने दर्ज किया है। और यह सीट अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से कांग्रेस का गढ़ ही माना जाता रहा है। हम यू भी कह सकते है कि डौंडीलोहारा विधानसभा सीट भेड़िया परिवार की सुरक्षित सीट है।हम ऐसा इसलिए भी कह रहे है। कि इस क्षेत्र में व इस सीट पर भेड़िया परिवार का राजनीतिक दबदबा अविभाजित मध्यप्रदेश में भी कायम रहा है। व छत्तीसगढ़ बनने के बाद कुछ वर्षो के अंतराल के बाद पुनः यह सीट भेड़िया परिवार के कंधों पर ही कायम बना हुआ है। स्व.झुमुकलाल भेड़िया बढ़े कद्दावर आदिवासी नेता, मध्यप्रदेश शासन में कई महत्त्वपूर्ण विभागों में मंत्री रहे,दूसरी पंक्ति में सहकारी नेता के रूप में स्थापित नाम डोमेन्द्र भेड़िया क्षेत्र में काफी प्रभावशाली व्यक्तिव ये भी इस सीट पर विधायक चुने गए वही भेड़िया खानदान की बहू वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार में महिला बाल विकास मंत्री है। श्रीमती अनिला भेड़िया जो दो बार इस सीट पर चुनी गई है।आने वाले समय मे भी डौंडीलोहारा की इस सीट पर मजबूत दावेदार मानी जा रही है। वही श्रीमती बसंती बाला भेड़िया ये सुरेंद्र भेड़िया की धर्मपत्नी व डोमेन्द्र भेड़िया की पुत्रवधू है। वर्तमान में इस सीट के बड़े भूभाग खासकर वनांचल क्षेत्र का जिला पंचायत सदस्य के रूप में आमजनता के बीच काम कर रही है। मतलब की बालोद जिला की राजनीति में बड़े पावरफूल राजनीतिक विरासत लिए हुए भेड़िया परिवार की कर्मभूमि डौंडीलोहारा विधानसभा सीट पर सहकारिता से लेकर पंचायती राज व बड़े ओहदों तक मे मजबूत पकड़ बरकरार है।
अब इस सीट पर दूसरी प्रमुख पार्टी भाजपा को ले तो यह बात सामने आता रहा है। कि इस सीट पर भेड़िया खानदान के उम्मीदवारी के बीच 90 से पहले व 90 के बाद भी भाजपा यहां कोई टक्कर नही दे पाया मसलन पार्टी के प्रत्याशी स्व.श्रीमती रमदसिया बाई हो या उखारम ठाकुर हो 8 से 10 हजार मतदाताओं के मतों की सीमा को ही छू पाते रहे है। वही कांग्रेस आसानी से हर चुनाव जीतते रही है। वही क्षेत्र की राजनीति में या यूं कहें कि डौंडीलोहारा सीट पर बदलाव होने के संकेत जब दिखाई दिए जब भाजपा पार्टी ने राजमहल की और अपना रुख किया व रानी माँ स्व. श्रीमती रानीलक्ष्मी बाई को झुमुकलाल भेड़िया के सामने खड़ा किया कमजोर भाजपा संगठन के बाद भी रानी लक्ष्मीबाई ने स्थापित चेहरा व बड़े राजनीतिक नेतृत्व झुमुकलाल भेड़िया को कड़ी टक्कर दी व वोटों की संख्या को लगभग 20 हजार तक लाने में सफल हुई वही दूसरे चुनावो में उनके छोटे बेटे स्व. लाल भूपेंद्र सिंह टेकाम ने भी वोट प्रतिशत को आगे बढ़ाया दोनो चुनावो में जीत तो नही मिला लेकिन भाजपा को व कार्यकर्ताओं को अब लगने लगा था कि कांग्रेस का किला को अगर ढहाना है तो राजमहल को ही सामने खड़ा करना होगा और यह निर्णय सही साबित हुआ तीसरे विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी रहे लाल महेंद्र सिंह टेकाम ने कांग्रेस के डोमेन्द्र भेड़िया को हराकर यह सीट को भाजपा की झोली में डाल दिया यह जीत ऐतिहासिक जीत थी डौंडीलोहारा से डौंडी ब्लाक में जश्न का माहौल देखा गया कार्यकर्ताओं में लंबे संघर्ष के बाद मिली जीत का अलग ही जुनून दिखाई दिया फिर राजनीतिकी गलियारों में जो खेल चलता है। उठापठक का वो फिर इस सीट पर चला और अगले चुनावों में महेंद्र टेकाम की टिकट काट कर उनकी पत्नी को दे दिया गया दूसरी तरफ भेड़िया परिवार के लिए भी पहली बार कांग्रेस ने बड़ा उलटफेर करते हुए भेड़िया के दावे को नकारते हुए डौंडी क्षेत्र की कदावर जिला पंचायत सदस्य अनिता कुमेटी को टिकट दे दिया। इस चुनाव में स्व. श्रीमती नीलिमा टेकाम ने कड़े मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी अनिता कुमेटी को हराकर भाजपा की जीत को कायम रखा व भाजपा का दूसरी बार परचम लहराया लेकिन समय के साथ बदलते समीकरणों ने नीलिमा टेकाम का टिकट काटकर वन अधिकारी रहे होरीलाल रावटे पर दांव लगाया सरकारी सेवा में काम करने वाले रावटे राजनीति में नए थे व जमीनी हकीकतों से राजनीतिक चालबाजियों,उठापठक से वाकिफ नही थे वे श्रीमती अनिला भेड़िया से चुनाव हार गए और वही से भेड़िया परिवार ने फिर से इस सीट को हासिल कर लिया । और आज छत्तीसगढ़ की राजनीति में फिर से भेड़िया परिवार की राजनीति को शीर्ष पर ले गए आज परिवार की बहू अनिला भेड़िया प्रदेश सरकार में मंत्री पद पर काबिज है।
डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र में कुल
215144 मतदाता हैं.
जिसमें पुरुष मतदाता 105433
महिला मतदाता 109707 और 4 अन्य मतदाता हैं।
आनेवाले 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से अंदरूनी तौर पर तो कई दावेदार नजर आते है। लेकिन खुलकर कोई दावेदारी दिखाई नही दे रहा जो सम्भावना दिखता है वो भी परिवार के अंदर से ही दिखाई दे रहा मसलन पूर्व विधायक डोमेन्द्र भेड़िया,जिला सदस्य बसंती बाला भेड़िया के अलावा कांग्रेस नेताओं में युवा नेता मिथलेश नुरेटी,जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष चन्द्रप्रभा सुधाकर भी दावेदारी में बड़े नामों में शामिल हो सकते है। वही भाजपा में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त दिखाई दे रहा है। जिनमे प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर,होरीलाल रावटे,शुभ सिंह कोरेटी,डॉ देवेंद्र माहला,रिटायर्ड आईपीएस राधेश्याम नायक,अनिता कुमेटी,सोमेश सोरी सहित अंदरखाने चलने वाली चर्चाओं की माने तो पार्टी का आला संगठन एक बार फिर राजमहल से दावेदारी ला सकती है। इस पर आश्चर्य नही किया जा सकता क्योंकि राजपरिवार के साथ एक बड़ा वोट बैंक व चुनावो को लेकर जातिगत समीकरणों का एक बड़ा तबका दिखाई देता है। जो भाजपा के लिए फायदेमंद होता है।
सुरक्षित ( आदिवासी ) सीट पर दोनों प्रमुख दलों की निगाहें हल्बा वोट व गोंड वोटो पर प्रमुख रहता है। और इस सीट पर दोनो समाज से मतदाताओं की एक बड़ी संख्या है। उसके बाद पिछड़े वर्ग के मतदाता,अनुसूचित जाति के साथ साथ सामान्य वर्ग के मतदाताओं की भूमिका रहता है। इस सीट पर त्रिकोणीय संघर्ष माना जाता रहा है। जैसे कि कांग्रेस ,भाजपा के साथ छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर संगठन भी चुनावो में लगातार प्रत्याशी उतारते है। और इस संगठन से जनकलाल ठाकुर पूर्व में विधायक रह चुके है। लेकिन हर चुनावो में जनकलाल ठाकुर को ही प्रत्यासी बनाने से ,धीरे धीरे बदलते राजनीति व कमजोर होते संगठन के साथ बीते पांच चुनावों में इस संगठन का कोई खास असर विधानसभा चुनावो में नही देखा जाता व इनकी भूमिका वोट काटने वाली पार्टी के रूप में बनी हुई है। यहां सीधे लड़ाई कांग्रेस व भाजपा के मध्य ही दिखाई दे रहा है। राजनीति के जानकार हल्बा समाज को कांग्रेस का मजबूत वोट बैंक मानते है।वही राजपरिवार के भाजपा के साथ आने से गोंड समाज का वोट बैंक भाजपा के पक्ष में जुड़ते रहा वही समाज मे राजनीति को लेकर जागरूकता भी बना है।
2003 विधानसभा चुनाव परिणाम
लाल महेंद्र सिंह, बीजेपी, कुल वोट मिले 46147
डोमेन्द्र भेड़िया, कांग्रेस, कुल वोट मिले 35404
2008 विधानसभा चुनाव परिणाम
नीलिमा सिंह, बीजेपी, कुल वोट मिले 41534
अनिता कुमेटी, कांग्रेस, कुल वोट मिले 37547
2013 विधानसभा चुनाव परिणाम
अनिला भेंडिया, कांग्रेस, कुल वोट मिले 66026
होरीलाल रवाटे, बीजेपी, कुल वोट मिले 46291
सर्व आदिवासी समाज की राजनीतिक भूमिका बड़ा उलटफेर कर सकती है :- भानुप्रतापपुर उप चुनावो में दोनों प्रमुख दलों के साथ साथ जो तीसरा मजबूत नाम चुनावों में दिखाई दे रहा था वो था अकबर राम कोर्राम जो सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले चुनावो में उतरे व दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों को कड़ी टक्कर दी व बड़ा वोट हासिल कर प्रदेश के आने वाले 2023 के चुनावों में सर्व आदिवासी समाज के लिए राजनीतिक खासकर चुनावी लड़ाई कर सत्ता हासिल कर समाज की भलाई का दरवाजा खोलने का काम कर दिया है। और प्रदेश के हर आदिवासी सुरक्षित विधानसभा सीट पर आश्चर्य नही की आदिवासी समाज चुनाव में उतरे क्योंकि कई बड़े नाम इस सीट पर समाज की ओर से आने की संभावना बनी हुई है। इससे अब राजनीति में किसको फायदा होगा य नुकसान वो चुनाव के बाद पता चलेगा। लेकिन दोनों प्रमुख पार्टियों के सामने ये बड़ा चुनावी टेंशन बना हुआ है। (चुनावी समीक्षा आगे भी )
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