

विकास कार्यों की मांग को लेकर बालोद कलेक्टर को पत्र सौंपते ब्लाक के सरपंच
इसी जिले में खनिज न्यास मद में गड़बड़ी को लेकर ED की छापेमारी हुई
जिले में चल रहे नलजल योजना को लेकर भी समय समय पर गड़बड़ी की बातें सामने आ रहा,सरपंचों ने भी आवाज उठाया
विकास कार्यों पर कमीशनबाजी,गड़बड़ी के खबरें तो मानो अब आम बात हो गया है। आपको आए दिन इस प्रकार की खबरें कभी खुलकर तो कभी अंदरूनी तौर पर सुनने पढ़ने को मिल जा रहा है। “सुशासन सरकार” के 2 वर्ष बीत रहे हैं। लेकिन जिस प्रकार से जिले के जनपद,पंचायत व अन्य जगहों में विकास कार्यों के स्वीकृति के लिए जनप्रतिनिधियों के हाथों में कामों को लेकर बड़ी बड़ी फाइलें देखा जा रहा उससे यह अनुमान तो लग ही रहा है। की पंचायत प्रतिनिधियों को इस सरकार में फिलहाल “feel good” महसूस नहीं हो रहा है। कहा जा सकता है कि सरकार से नीचे स्तर तक के जनप्रतिनिधि वर्तमान में खुश नजर नहीं आ रहे हैं। गांवों के विकास को लेकर वो अभी तक सिर्फ स्वीकृति का इंतजार ही कर रहा है।
सरकार की कई योजनाएं विकास कार्यों को लेकर – सरकार चाहे किसी भी दल की हो सरकार के द्वारा कई योजनाओं से ग्रामीण विकास के लिए राशि स्वीकृत होता है। वही बालोद जिला DMF यानी कि खनिज न्यास मद से बड़े पैमाने पर कार्य स्वीकृत के लिए राशि मिलता है। ऐसा मान सकते हैं। बावजूद कार्य के लिए पंचायतों से मिलने वाले प्रस्ताव की बात करे तो बड़ी संख्या में मांग के लिए दिखाई देते हैं। मतलब साफ है कि योजनाओं का सही तरीके से सभी पंचायतों में कार्य स्वीकृत नहीं हो पा रहा है। कही न कही कुछ कमी तो है।
विकास पर “कमीशन” की छाया – सरकार किसी की भी हो विकास कार्यों पर कमीशन खोरी व गड़बड़ी की खबरें तो आजकल आम बात हो गया है। ऐसी खबरें आए दिन अंदर खाने सुना जा सकता है कि कार्य स्वीकृति के लिए इतने प्रतिशत कमीशन की मांग हो रहा, पंचायतों में काम के बदले कमीशन की डिमांड आ रहा है। लेकिन कोई खुलकर यह बताने को तैयार नहीं कि यह विकास पुरुष आखिर कौन है ? वो कौन जादूगर है ? जो कमीशन लेकर बड़े पैमाने पर कार्य स्वीकृत करा देता है। आखिर उस अदृश्य मानव के पास ऐसे कौन सी शक्ति है जो झट पैसा लेकर पट काम करा दे रहा है। यह बाते हम सत्यता के आधार पर नहीं वरन चर्चाओं के आधार पर बता रहे हैं। की जमीन स्तर पर अंदर खाने ऐसे चर्चाएं बालोद जिला में आम हो गया है।
एक फिल्म का गाना था “बाप बड़ा न भैय्या सबसे बड़ा रुपया” आज वर्तमान समय में गाने के यह बोल कही सच में विकास कार्यों की स्वीकृति पर मेल तो नहीं खा रहे हैं। क्योंकि इस प्रकार के बातें भी सुनाई देता है कि किसी पंचायत में बड़े पैमाने पर कार्य स्वीकृत हो रहे वही किसी पंचायत में एक कार्य के लिए जनप्रतिनिधियों को फाइल लेकर घूमते देखा जा सकता है। आखिर पंचायतों में इस प्रकार से बेमेल स्वीकृति का आधार क्या है। कही अदृश्य शक्ति का जादू तो नहीं चल रहा ।
नगरीय निकायों में लंबे अंतराल के बाद करोड़ों की स्वीकृति की घोषणा – जिले के 2 नगर पालिका व डौंडीलोहारा,डौंडी,चिखलाकसा में हाल ही में विभाग के मंत्री ने करोड़ों रूपये के नए विकास कार्य की घोषणा की हैं। निकाय चुनावों के बाद यह बड़ी स्वीकृति होगी क्योंकि आयोजन मंच में क्षेत्रीय विधायक अनिला भेड़िया ने भी कहा था कि सरकार गठन के बाद अभी तक 2 वर्ष बीत गए नगर विकास के लिए राशि नहीं मिल पाया है। वही मंच से अरुण साव उपमुख्यमंत्री ने बातों को नकारते हुए करोड़ों की राशि देने की घोषणा कर दी
नगरीय निकाय मे भी कही ” विकास पुरुष” या जादूगर का खेल न हो जाए – नगर विकास के लिए 12 से 13 करोड़ रुपए देने की घोषणा बाद नए कार्यों की स्वीकृति के लिए निकाय के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि एक्टिव मोड पर दिखाई दे रहे हैं। प्रस्तावों की नई फाइल तैयार हो रहा है। लेकिन इस बात का आशंका भी बना हुआ है। की पंचायतो में जो “अदृश्य शक्ति” अंदर खाने कमीशन लेकर जादू का पिटारा खोल देता है । वो कही बाहर बैठकर नगर विकास के लिए अभी से डमरू बजाकर नए कार्य के लिए मोलभाव का खेल तो नहीं खेल रहा ?
बहरहाल मामला जो भी हो जिस प्रकार की बातें वर्तमान समय में बाहर आ रहा या चल रहा वो ठीक नहीं है। सरकार बिना भेदभाव के खुले मन से विकास के लिए राशि दे रहे हैं। लेकिन अगर ऐसे कामों को लेकर कोई बिचौलिया,कमीशनबाजी या गड़बड़ी करने का काम कर रहा हो तो यह हम सबकी जिम्मेदारी भी है। की ऐसे शख्स की पहचान कर उसको उजागर करें ताकि सरकार की सेहत पर कोई ऊंगली न उठा सके । व ऐसे लोगों से दूर रहे। ऐसे लोगों की पहचान उजागर हो जनता के सामने।
पार्टी की बुरी हार का असर पंचायतों पर तो नहीं पढ़ रहा – बालोद जिला के तीनों विधानसभा चुनावों में भाजपा की बुरी तरह हार हो रहा है। वही विगत 15 वर्षों से कांग्रेस पार्टी को डौंडीलोहारा ,बालोद, गुण्डरदेही में शानदार जीत मिल रहा,बालोद जिला निर्माण करने के बाद भी भाजपा की करारी हार और सीटों पर कांग्रेस के विजय बाद विपक्ष के विधायकों की जीत के कारण नए कार्यों की स्वीकृति पर तो नहीं पड़ रहा यह भी बड़ा प्रश्न हैं। क्योंकि प्रदेश में भाजपा की सरकार है ।
नगरीय निकायों में 2 साल बाद – करोड़ों के नए कार्य स्वीकृत
पंचायत चुनावों के आठ माह बीतने के बाद भी सरपंच मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर संघर्ष करते नजर आ रहे।
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