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शुभ मुहूर्त में जलाई होली, होलिका में जलकर भस्म हुई सामाजिक बुराइयां, पूजा और अग्नि की परिक्रमा कर निभाई परंपरा

शुभ मुहूर्त में जलाई होली होलिका में जलकर भस्म हुई सामाजिक बुराइयां, पूजा और अग्नि की परिक्रमा कर निभाई परंपरा

मंगल नहीं बुधवार को होगा रंगोत्सव

सरायपाली – लोगों ने दहन से पहले होलिका की जल, रोली, अक्षत और फूलों से पूजा-पाठ कर अग्नि की परिक्रमा की। इससे शरीर और मन की नई साकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हुई। सोमवार को नगर में शाम 6 बजे से ही चौक-चौराहों, मोहल्लों व वार्डों में लोगों ने पुरानी सामग्री, सामाजिक बुराइयों के कारकों जैसे नशीले पदार्थों, अंधविश्वास की भाव को होलिका में जलाकर भस्म किया। साथ ही साथ पौराणिक परंपराओं की प्रक्रिया को निभाया। होलिका के समक्ष लोगों ने मन व बहारी वातावारण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा और जीवन की बाधाओं को भस्म करने होलिका की अग्नि में उपले डालने और परंपराओं को निभाया। लोगों ने होलिका की पूजा-अर्चना कर परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। धार्मिक मान्याताओं व आयुर्वेद के अनुसार गोबर के उपले जलते हैं तो उनसे निकलने वाला धुआं प्राकृतिक एयर-प्यूरीफायर का काम करता है। यह वातावरण में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं और बैक्टीरिया का नाश कर हवा को शुद्ध बनाता है। यही वजह है कि हमारे पूर्वजों ने यज्ञ और हवन में भी इसके उपयोग को अनिवार्य किया है। शहर में जगह-जगह मान्याताओं के अनुरूप होलिका दहन की और आदिकाल से चली आ रही परंपराओं को पूरे विधि-विधान से निभाया गया।

होली का त्योहार जितना रंगों के लिए खास होता है, उतना ही महत्वपूर्ण होलिका दहन भी माना जाता है. सोमवार की रात होलिका दहन उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया । नगर सहित अंचल में लगभग दर्जन स्थानों पर होलिका दहन किया गया। बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रूप में लोगों ने पारंपरिक पूजा अर्चना के बाद होलिका जालाई।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा की शाम को होलिका दहन किया जाता है. यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, जहां लकड़यों के ढेर को जलाकर लोग अपनी सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. आमतौर पर, इसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है. लेकिन खगोलीय घटनाओं के कारण, इस साल उत्सव की तारीखों में बदलाव देखने को मिल रहा है। जिससे लोगों में असमंजस की स्थिति बन गई है। यही कारण है कई जगह होली का दहन मंगलवार को किया जा रहा है। हलाकि नगर सहित आसपास में पुरे इलाके में सोमवार 2 मार्च को होलिका दहन मुहूर्त अनुसार किया गया ।
दोपहर को होली का पूजन खासकर महिलाओं ने होलिका की पूजा अर्चना की। इस मौके पर लोगो ने खासकर महिलाओ ने होलिका की 7 बार परिक्रमा की।

ग्रहण के कारण तिथि में असमंजस

इस बार लकड़ी की जगह लोगों ने ज्यादातर गोबर के कंडो की होली जलाई। कई जगहों पर नगाडो के साथ फाग गीतों पर लोग नाचते झूमते नजर आए। हालांकि इस बार नगाड़ों की आवाज नहीं के बराबर सुनाई दी। लेकिन होलिका दहन की रात नगाड़ों ने एक प्रकार से एहसास कराया की कल होली है। होलिका दहन को लेकर पुलिस प्रशासन भी सक्रिय दिखा। पुलिस की गाड़ियां सायरन बजाते हुए शहर व आसपास के गांव में घूमते नजर आई। ऐसे तो होली के जलने के बाद रग पर्व शुरू हो जाता है। सुबह होते ही लोग सड़को पर आ जाते है, खासकर बच्चे टोलियों में उत्साह के साथ एक दुसरे को रंग लगाकर होली खेलते है। और आमतौर पर, इसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है. बार होलिका दहन को लेकर लेकर लोगों में थोड़ी भ्रम की स्थिति है, खगोलीय घटनाओं के कारण, इस साल उत्सव की तारीखों में बदलाव देखने को मिल रहा है, इसलिए आज नही 4 मार्च को रंगों की होली मनाई जाएगी।

धूमधाम से मनाया जाएगा

कल बुधवार को होली का रंग पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस बार कई लोग फूलों की होली खेलने परिवार के साथ वृंदावन निकल गए हैं। इसी तरह शहर के लगभग युवा विशाखापट्टनम, गोवा, थाईलैंड में होली मनाएंगे। एक समय था जब लोगो होली का इंतजार रहता था. लोग दोस्त यारो के साथ रंग खेलने सुबह से सडको पर पहुंच जाते थे, लेकिन अब होली में लोग घरो से बाहर भी निकलना पसंद नही करते मोबाईल पर मेसेज भेजकर एक दुसरे को होली की बधाई देकर परिवार के साथ घरो में ही होली मनाते है।

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