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डौंडीलोहारा :- ग्राम कामता में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के चौथे दिवस पंडित राजेश तिवारी लोधी खपरी साजा ने गजेंद्र मोक्ष की कथा बताते हुए कहा कि जैसे मनुष्य या कोई भी जीव अपने सांसारिक माया मोह को छोड़कर जैसे ही अपना सर्वस्व भगवान को समर्पित कर देता है, तत्क्षण भगवान उसे मोक्ष प्रदान करते है जैसे गजेंद्र को भगवान ने मोक्ष प्रदान किया।
हमारे भगवान इतने दयालु है कि भक्त अगर क्षण मात्र संकट में हो तो भगवान तुरंत उसे उस संकट से निकाल देते है। पंडित श्री तिवारी ने भगवान वामन जन्म का व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान समूचे सृष्टि के पालनहार है परंतु राजा बलि के घर तीन पग भूमि की भिक्षा मांगकर समस्त देवताओं की संपत्ति जो देवताओं ने देवासुर संग्राम में हार गए थे उसे उन्हें वापस कर राजा बलि को पाताल लोक के राजा बनाकर उसे चिरंजीव होने का वरदान देकर स्वयं भगवान राजा बलि के द्वारपाल बन गए। भक्त का मान बढ़ाने व अभय प्रदान करने भगवान स्वयं लीला करते हैं। माता लक्ष्मी ने देव ऋषि नारद जी से पूछा कि भगवान बहुत दिनों से बैकुंठ धाम नही आये हैं तो नारद जी ने सारा वृत्तान्त माता लक्ष्मी को सुनाये और माता लक्ष्मी श्रावण मास के पूर्णिमा को राजा बलि के यहां जाकर उन्हें अपना भाई बनाकर रक्षासूत्र बांधा और उपहार में भगवान श्रीहरि को मांगकर बैकुंठ धाम चले गए । इसी दिन से रक्षाबंधन का पर्व शुरू हुआ। कथा के दूसरे सत्र में व्यास पीठ पर विराजमान पंडित राजेश तिवारी ने एकादशी व्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एकादशी व्रत करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते है और पुरुषोत्तम महीने में किया गया व्रत प्राणी को मोक्ष प्रदान करता है। यदि कोई भी मनुष्य 12 महीने व्रत नही कर पाता है और भीमसेनी एकादशी जो ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में आता है, उस व्रत को कर लेता है तो 12 माह के व्रत का फल प्राप्त होता है। श्री तिवारी ने भगवान श्रीराम व श्री कृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए श्रोताओं को भावविभोर कर रहे थे। दर्शक दीर्घा तालियों की सेवा करते हुए आनन्दित हो रहे थे।
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