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कांकेर लोकसभा चुनाव-छाया विधायकों के साथ नए जिला अध्यक्ष की साख भी दांव पर

बालोद – लोकसभा चुनावों के परिणाम में अब कुछ ही दिन शेष बचे है। जब 4 जून को लोकसभा चुनावों की मतगणना के साथ सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला हो जाएगा और जनता के बीच परिणाम सामने होंगे वही जनता को उनके लोकसभा का नया निर्वाचित सांसद भी मिल जाएगा ।

अब हम बात करते है। कांकेर लोकसभा क्षेत्र का जहां दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में कड़ी टक्कर बताया जा रहा भाजपा के भोजराज नाग व कांग्रेस के वीरेश ठाकुर( मंडावी) के बीच ही मुकाबला है। भाजपा ने वर्तमान सांसद मोहन मंडावी की टिकट काटकर पूर्व विधायक भोजराज नाग को मैदान में उतारा है। वही पिछले चुनावों में बहुत ही कम वोटों से हारने वाले बीरेश ठाकुर पर भरोसा जताया है। मतदान के बाद दोनों दलों के नेता अपनी अपनी जीत के दावे तो कर रहे है। मगर दावों में वो मजबूती नजर नही आ रहा है। जैसे कि अमूमन देखने को मिलता है। भाजपा जहां नरेंद्र मोदी के चेहरे व सहारे चुनाव जीतने की दौड़ में बनी हुई है। वही कांग्रेस पिछले चुनावो में हार के कम अंतर से उत्साहित होकर इस चुनावों में जीत दर्ज करने की बात कह रही है।वही जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा बना हुआ है।

बालोद जिले के मतदाता निर्णायक भूमिका में -फिर एक बार सामने दिख रहे है। पूर्व के चुनावी नतीजों की बात करे तो भाजपा के मोहन मंडावी ने इसी जिले से बढ़त बनाकर जीत दर्ज किया था। लेकिन जीत का अंतर मात्र लगभग 6 हजार के आसपास ही था वीरेश ठाकुर बालोद जिला की राजनीति में हार के बावजूद सक्रिय बने रहे। वही युवा व आमजन में अपने सरल रहन सहन व व्यवहार से भी प्रभावशाली माने जाते रहे है। जो इन चुनावों में बड़ा फैक्टर भी है। चुनावों में मतदान के बाद जो अंदर खाने राजनीतिक चर्चाएं होती है। उसके अनुसार कांकेर जिले के पांच विधानसभा सीटों में कड़ी टक्कर दिखाई दे रहा है।कही भाजपा आगे दिखाई दे रहा तो कही कांग्रेस की बढ़त लेने की बाते कही जा रही है। जिससे बालोद जिला के मतदाता फिर एक बार निर्णायक की भूमिका में है।

जिला अध्यक्ष का नया नेतृत्व व छाया विधायकों के परफार्मेंस की भी परीक्षा होगी लोकसभा चुनावों के नतीजों में :-15 सालों से विधानसभा चुनाव हार रही भाजपा के सामने हाल ही में चुनावों में मिली हार से उबरने का एक मौका है। लोकसभा का चुनाव जहां हारे हुए भाजपा उम्मीदवार के सामने अपने विधानसभा सीट पर लोकसभा के चुनावों में बढ़त दिलाने का बड़ा दबाव है। वही नए भाजपा जिला अध्यक्ष के सामने तीनों सीट हारने के बाद मिली संगठन की जिम्मेदारी के बाद जिले की तीनों सीटों में बढ़त बनाये रखने की चुनौती भी है।

हार जीत से प्रभावित हो सकता है जिले की राजनीति -लोकसभा चुनावों के नतीजे दोनों राजनीतिक दलों के नेताओं के आगे की राजनीति में उनका भविष्य तय करने वाले हो सकते है। कांग्रेस में अपने संगठन नेतृत्व में तीनों विधानसभा सीट जीतकर जिला अध्यक्ष चन्द्रप्रभा सुधाकर ने कांग्रेस आलाकमान के सामने बेहतर परिणाम दे दिया है। वही भाजपा नेताओं व संगठन नेताओं के सामने परिणाम पूर्व बड़ी उहापोहा की स्थिति बनी हुई दिख रही है। क्योंकि तीनों सीटों पर बड़ी हार का सामना हुआ है। लोकसभा चुनावों के परिणामों के अनुसार ही जिले के बड़े भाजपा नेताओं की अगली राजनीतिक पारी तय हो सकता है।

छाया विधायकों पर जितने तो कांग्रेस विधायकों पर अपनी सीटों पर जीत को बनाये रखने की चुनौती :-जिले की राजनीति में कांग्रेसी विधायकों संगीता सिन्हा,अनिला भेड़िया,कुंवर सिंह निषाद के सामने अपनी सीटों पर लोकसभा चुनावों में जीत को बरकरार रखने की चिंता है। वही हारने वाले भाजपा के छाया विधायकों वीरेंद्र साहू गुंडरदेही,राकेश यादव बालोद,देवलाल ठाकुर डौंडी लोहारा पर हार के अंतर को मिटाकर जीतने की बड़ी जिम्मेदारी भी है। अब आगे देखना होगा कि किसकी शह और किसकी मात होती है।

कांकेर लोकसभा सीट में 4 जिलों की 8 विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें 5 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है, तो वहीं 3 सीटें भाजपा के खाते में है। 2019 लोकसभा चुनाव की बात करें, तो पूरी 8 सीटें कांग्रेस के कब्जे में थीं, इसके बावजूद बिरेश ठाकुर को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार भी भाजपा के भोजराज नाग से कांग्रेस के बिरेश ठाकुर का कड़ा मुकाबला दिखाई दे रहा है।

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