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भारतीय शिक्षण मंडल प्रान्त कार्यकारणी की बैठक सम्पन्न

cg24 आजतक

आज तक देश की किसी भी नीति को बनाने में इतना प्रयास नहीं हुआ, जितनी गहराई से राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बनाने में मंथन किया गया। अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति को धरातल पर सही ढंग से लागू कर इसे वैश्विक बनाने में सभी शिक्षाविद् को अग्रणी भूमिका निभानी होगी।

भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने कहा कि गुरुकुलों में आज भी पारंपरिक रीति से कलाओं का अध्यापन तथा अभ्यास कराया जा रहा है। विश्वविद्यालय को गुरुकुलों के महाविद्यालयों में संपर्क करने की आवश्यकता है। आधुनिक विज्ञान के अध्यापन के साथ-साथ विश्वविद्यालयों में लागू होने वाले पाठ्यक्रमों में भारतीयता की पूर्णता अपेक्षित है। आयुर्वेद, स्थापत्यवेद, धनुर्वेद तथा सभी कलाओं का अध्यापन महाविद्यालय तथा विश्वविद्यालयों में होने के लिए अपेक्षित संसाधनों की तैयारी विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय और उनको कार्यान्वित करने के लिए अपेक्षित स्वातंत्र्य देने की तैयारी सरकार को करनी चाहिए।
संगोष्ठी का प्रारंभ डॉ. अम्बर व्यास के वैदिक मंगलाचरण से हुआ। इस कार्यक्रम में प्रो. पी के बाजपेई प्रान्त अध्यक्ष भारतीय शिक्षण मंडल छत्तीसगढ़ द्वारा प्रान्त की गतिविधियां एवम विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। इस अवसर पर राष्ट्रीय युवा आयाम प्रमुख डॉ नीता बाजपेई, सीवी रमन विश्वविद्यालय बिलासपुर कुलपति प्रो आर पी दुबे, प्रांत के संरक्षकगण प्रो. रोहणी प्रसाद, प्रो शैलेन्द्र सर्राफ, डॉ.मनीष उपाध्याय, डॉ अश्वनी दीक्षित, डॉ ए के श्रीवास्तव, प्रो स्वर्णलता सराफ,प्रो के एन सिंह, प्रो भास्कर बाजपेयी डायरेक्टर आईआईटी, डॉअखिलेश जैन, श्री शेषनारायण गजेंद्र, कौशल गजेंद्र एवम प्रान्त के कार्यकर्तागण उपस्थित रहे। उक्त जानकारी प्रांत प्रचार प्रमुख भारतीय शिक्षण मंडल मनोज साहू ने दिया।

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